The Spirit of Ghazals - लफ़्ज़ों का खेल | Urdu & Hindi Poetry, Shayari of Famous Poets: kumar shashi
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मेरी असली मोह्बत..✍

December 09, 2016 0
हम ने तो किया था सब से मोह्बत  ना जाने मेरी असली मोह्बत कोन थी सब से जा जा कर पूछ लिया ग़ालिब ओ भी नहीं बता पाये की मेरी असली मोह्बत...
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​*मैं और वो*....✍

December 09, 2016 0
गुलमोहर की  ठंडी छांव में , लहराता सिमटता सा आंचल , और उसकी आँखें भाव विह्वल । मेंहदी रचे पांव , पायल के बजते घुंघरू हमारी नजरों ...
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अपने घर के बड़े..✍

December 09, 2016 0
​ये जो "छोटू" होते हैं न ? जो चाय दुकानो या होटलों  वगैरह में काम करते हैं --- वास्तव में ये अपने घर के  "बड़े"...
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Meri Qalam Mere Jazbaat♡#_तन्हा_दिल...✍

December 09, 2016 0
​लगभग एक साल के बाद उसका फोन आया।  जी भरकर लड़ी........ जी भरकर रोई। फिर रखते-रखते बोली हर बार की तरह इस बार भी व्रत थी और तुम्हारी आ...
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मेरे जीने की वजह..मेरी ज़िन्दगी की ज़रूरत हो तुम..✍

December 09, 2016 0
ख़ुदा की बख़्शी इनायत हो तुम जो कभी न छूटे वो आदत हो तुम मुझको पूरा करती है मोहब्बत तुम्हारी जो कभी न ख़त्म हो वो इबारत हो तुम। मुझे ...
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​कतारें थककर भी खामोश हैं,नजारे बोल रहे हैं...✍

December 09, 2016 0
कतारें थक कर भी खामोश हैं,नजारे बोल रहे हैं। नदी बहकर भी चुप है मगर किनारे बोल रहे हैं। ये कैसा जलजला आया  है दुनियाँ में इन दिनों, ...
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♡ मेरी  ♡माँ .......✍

December 09, 2016 0
हर  ख़ुशी अपनी मुझमें ढूँढ लेती है मेरी माँ मुझमें अपनी ज़िन्दगी ढूँढ लेती है हर लम्हा मुझपर  वार कर अपना, मेरी  माँ अपनी ज़िन्दगी  जी...
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​मेरा खुद का जमीर कहता है मुझे थोड़ा और अमीर कर...✍

December 09, 2016 0
​मेरा खुद का जमीर कहता है मुझे थोड़ा और अमीर कर ! अपने दिल पर हाँथ रखकर अपने जमीर को और जमीर कर  कश्तियाँ डूब जाऐं भँवर-ऐ-जिंदगी में, तो...
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