तुम माँ हो तुम ऐसा न करो..✍ - The Spirit of Ghazals - लफ़्ज़ों का खेल | Urdu & Hindi Poetry, Shayari of Famous Poets
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दुःख सह के जो जो सुख पहुचती है ..
उस ममता को रुशवा न करो तुम माँ हो तुम माँ हो तुम ऐसा न करो ..
तुम ही से इंसान कोये जिस्म मिला ओरे ये जान मिलीने की का चलन इमा की लगन सचाई की पहचान मिली.. कुदरत ने दिया है जो रुतबा उस रुतबे को निचा न करो तुम माँ हो तुम माँ हो तुम ऐसा न करो ...
तुम माँ हो तुम्हारे क़दमों केजन्नत की बहारें फलती है तालीम के गुलशन खिलते है तहज़ीब की शमए जलती है. इस घर का उजाला मत चिनोइस डाली को सुना न करो तुम माँ हो तुम माँ हो तुम ऐसा न करो ...
तुम माँ हो तुम्हें इस दुनिया मेंजानो की हिफाज़त करना है ठुकराके हर इक खुदगर्ज़ी को इंसानो की खिदमत करना है तुम नस्लो की खेती सींचती हो तुम जानो का सौदा न करो ..
तुम माँ हो तुम माँ हो तुम ऐसा न करो तुम अच्छी तरह पहचानती हो औलाद का गम क्या होता है ये तीरे सितम क्या होता है ये बार आलम क्या होता है..
.. कुमार शशि..... 
#_तन्हा_दिल...✍Meri Qalam Mere Jazbaat♡
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