​"सुन पगली" तुझसे हुई थी मेरी मोहब्बत की तलाश शुरू.... और तू ही मुझे ठुकरा के बैठी है.... - The Spirit of Ghazals - लफ़्ज़ों का खेल | Urdu & Hindi Poetry, Shayari of Famous Poets
​"सुन पगली" तुझसे हुई थी मेरी मोहब्बत की तलाश शुरू....  और तू ही मुझे ठुकरा के बैठी है....

​"सुन पगली" तुझसे हुई थी मेरी मोहब्बत की तलाश शुरू.... और तू ही मुझे ठुकरा के बैठी है....

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​"सुन पगली"
तुझसे हुई थी मेरी मोहब्बत की तलाश शुरू....
और तू ही मुझे ठुकरा के बैठी है....
मैं भटक रहा हू आज तक वीरानो में....
आज तू किसी और के साथ अपना जहाँ बसा के बैठी है....
तेरे नाम से कभी संजाऐ थे कितने आशिया मैने....
और तू ही मुझे भूलके बैठी है....
मेरी आँखो का हर खवाब तोड़ कर....
आज तू जाने कितने खवाब सज़ाके बैठी है....
तेरी ज़िंदगी को रोशन करते करते मैं ही बुझ गया.....
और तू मेरा नाम-ओ-निशान तक मिटाके बैठी है.....
जो किसी का दिल बेरेहमी से घायल कर चुकी हो......
यकीन नही होता वो आज किसी और की चाहत की मशाल जला के बैठी है......
   ✍••• ••• कुमार शशि••••••••✍
- #Dedicated ♡My L0ve♡

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